मंगलवार 14 अप्रैल 2026 - 11:20
सभी मुसलमानों के लिए ईरान की मदद के लिए एकजुट होना अनिवार्य है/शिया और सुन्नी के बीच दुश्मनी का इस्लाम में कोई स्थान नहीं है

हौज़ा / तंजानिया के पवानी प्रांत के वरिष्ठ शेख, शेख खमीस अब्बास मुतूपा ने अपने भाषण में मुसलमानों से ईरान की मदद के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिया-सुन्नी दुश्मनी आज की दुनिया में कोई मायने नहीं रखती, बल्कि यह एक राजनीतिक उपज है जिसे मुसलमानों में फूट डालने के लिए पैदा किया गया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,तंजानिया के पवानी प्रांत के वरिष्ठ शेख, शेख खमीस अब्बास मुतूपा ने अपने भाषण में मुसलमानों से ईरान की मदद के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिया-सुन्नी दुश्मनी आज की दुनिया में कोई मायने नहीं रखती, बल्कि यह एक राजनीतिक उपज है जिसे मुसलमानों में फूट डालने के लिए पैदा किया गया है।

शेख मुतूपा ने कहा,ईरान मुसलमानों का नेता है। मुझे पता है कि यह कहने से कुछ लोग नाराज़ होंगे, लेकिन सच बोलना चाहिए। अब वक्त आ गया है कि मुसलमान एकजुट होकर ईरान की मदद करें।उन्होंने कहा कि कतर, अमीरात, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देश फिलिस्तीन के करीब होने के बावजूद उसकी कोई मदद नहीं कर रहे, जैसे फिलिस्तीन कोई इस्लामिक देश ही न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में लेबनान पर मिसाइल हमले हुए, जैसे पिछले तीस साल में किसी और देश पर नहीं हुए। सैकड़ों मुसलमान शहीद हुए, लेकिन किसी भी अरब देश ने इन हराम कत्लेआम की निंदा नहीं की।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया में बहुत से लोग शिया-सुन्नी दुश्मनी में फंसे हुए हैं, जबकि ईरान अकेला ऐसा देश है जो इस्लाम की रक्षा के लिए मैदान में उतरा है।

शेख मुतूपा ने यह भी कहा कि अमेरिका ने सोचा था कि ईरान के इंकेलाबी नेता आयतुल्लाह ख़ामेनई की हत्या करके वह ईरान पर कब्ज़ा कर सकता है, लेकिन उसका हिसाब गलत निकला। अमेरिका ने सोचा था कि वह ईरान को चार दिनों में तबाह कर देगा, लेकिन वह भी नाकाम रहा।

उन्होंने कहा कि ईरान एक मजबूत व्यवस्था से चलता है, इसलिए अपने नेता की हत्या के बाद भी वह डगमगाया नहीं, बल्कि उसने दूसरा, अधिक मजबूत नेता चुन लिया। इसलिए अमेरिका को यह नहीं सोचना चाहिए कि ईरान वेनेजुएला जैसा है, जहाँ वह जब चाहे हस्तक्षेप कर सके।

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